Sunday, March 1, 2015

कुछ तो हुआ है

मन कुछ भारी सा,
दिन भी है कुछ भारी
सपने कुछ भारी से,
कदम भी है भारी
हुआ जो,
न रख सकता अंदर,
कह देता, तो है,
कमजोरी
रखा जहाँ सब लगा,
मिल न पाया,
जो चाहा वहां,
छीनने की कोशिश करूँ
कहाँ ऐसी नियत हमारी,
मंन कुछ भारी सा,
दिन भी है कुछ भारी
अब आगे देखूं,
ना इच्छा, ना सोच कोई
बदलना चाहता दिनों को,
पर कहाँ ऐसी साहस मेरी,
मन कुछ भारी सा,
दिन भी है कुछ भारी
सपने कुछ भारी से,
कदम भी है भारी

              © ऐश्वर्य कुमार श्रीवास्तव

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